SEBI (Securities and Exchange Board of India)
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड“सिक्योरिटी एक्सचेंज एंड बोर्ड ऑफ़ इंडिया” सेबी का फुल फॉर्म होता है। जिसे “भारतीय प्रतिभूति और विनयम बोर्ड”भी कहा जाता है।
शेयर बाजार जैसे बड़े बाजार में हो रही गतिविधियों की निगरानी के लिए एक मजबूत संस्था की आवश्यकता शुरुआत से ही थी। इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत सरकार के द्वारा सेबी का निर्माण किया गया। सेबी का मुख्य उद्देश्य शेयर बाजार में निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करने का काम करता है।
Contents
सेबी क्या है
सेबी का इतिहास
सेबी एक्ट 1992 (Sebi Act 1992)
सेबी के कार्य
सेबी क्या है
किसी भी बाजार या व्यापार की निगरानी के लिए एक संस्था की
आवश्यकता होती है।जैसे आरबीआई भारत में बैंकों की निगरानी करने के लिए है, ठीक उसी
तराह सेबी शेयर बाजार की निगरानी करने के लिए उभरा है।
सेबी के आगमन से पहले,
बाजार पर धोखाधड़ी या घोटाला बहुत आम था।लेकिन सेबी के आने के बाद कई नए नियम लाए गए,
सेबी, सिक्योरिटीज
एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया, एक नियामक संस्था है, जो सिक्योरिटीज मार्केट में स्टॉक
के ट्रांजेक्शन को रेगुलेट करने के लिए बनाई गई है।
सेबी मुख्य रूप से प्रतिभूतियों (Securities), निवेशकों (Investors), बाजार मध्यवर्ती (Market Intermediates), को रेगुलेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सेबी का इतिहास
सेबी की स्थापना भारत
सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर वर्ष 1988 में की गई ,और इसे वैधानिक अधिकार वर्ष
1992 में भारतीय संसद द्वारा पारित सेबी अधिनियम,
1992 के तहेत प्राप्त हुआ,
SEBI का मुख्यालय मुंबई
के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में है। इसके नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद
में उत्तरी, पूर्वी, दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
सेबी के अस्तित्व में
आने से पहले कंट्रोलर ऑफ़ कैपिटल इश्यूज (Controller of Capital Issues) एक नियामक प्राधिकरण
(Regulatory Authority) था। इसे कैपिटल इश्यूज़ (कंट्रोल) एक्ट, 1947 के तहत अधिकार
दिया गया।
शुरुआत में, सेबी बिना
किसी वैधानिक शक्ति के एक गैर वैधानिक निकाय था।
हालाँकि 1995 में,
सेबी को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 में संशोधन के माध्यम से भारत
सरकार द्वारा अतिरिक्त वैधानिक शक्ति प्रदान की गई थी।
अप्रैल, 1988 में सेबी
का गठन भारत सरकार के एक प्रस्ताव के तहत भारत में पूंजी बाजार के नियामक के रूप में
किया गया था।
सेबी एक्ट 1992 (Sebi Act 1992)
भारत सरकार के द्वारा
संसद में सेबी अधिनियम (एक्ट) 1992 पारित किया
गया,जिससे सेबी को गैर-संवैधानिक से संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। इस एक्ट के अनुसार,
स्टॉक एक्सचेंज और अन्य प्रतिभूति बाजारों (सिक्योरिटीज मार्केट) के रेगुलेशन को नियंत्रण
करने की शक्ति प्राप्त है। यह स्टॉकब्रोकर,
सब-ब्रोकर्स, रजिस्ट्रार, ट्रस्टी, बैंकर्स से एक इश्यू, पोर्टफोलियो मैनेजर और अन्य
बिचौलियों के क्रिया कलाप को नियंत्रित और ऑडिट भी करता है।
सेबी के कार्य
आमतौर पर सेबी का प्रमुख
उद्देश्य निवेशकों के हितों का उत्तम संरक्षण प्रदान करना, वर्तमान कानूनों तथा नियंत्रणों
में परिवर्तन के सम्बन्ध में सेबी अब एक स्वायत्त संस्था है और अब उसे सरकार से अनुमति
लेने की आवश्यकता नहीं। इसके निर्धारित कार्य निम्नलिखित हैं-
1. सुरक्षात्मक कार्य
• ट्रेडर्स
और निवेशकों के हितों की रक्षा करना
• मूल्यों
में हेराफेरी को नियंत्रण करना
• इनसाइडर
ट्रेडिंग पर निगरानी
2. विकासात्मक कार्य
(Developmental Functions)
• वित्तीय
बाजार में प्क्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म को लाया
गया है ।
• सिक्योरिटीज
के DEMAT फॉर्म का परिचय
• वित्तीय
मध्यस्थों के लिए समय समय पर प्रशिक्षण
प्रदान करना।
• एक्सचेंज
के माध्यम से IPO की अनुमति देना।
3. विनियामक कार्य
(Regulatory Functions)
• शेयर
बाजार के एजेंट, ट्रस्टी आदि सेबी में पंजीकृत होते हैं।
• यह
म्यूचुअल फंड के कार्य और कंपनियों के अधिग्रहण को नियंत्रित करता है।
निष्कर्ष:
आज हमने इस
लेख में जाना की SEBI क्या होता
है ,किसी निवेशक
के लिए यह
कितना जरुरी है|
अगर आपका कोई
सवाल या सुझाव
है तो आप
हमे कमेंट कर
सकते है |
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Good
जवाब देंहटाएंGood explain about of SEBI 👍
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